नई दिल्ली : रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर केन्द्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया है। 16 पन्नों के इस हलफनामें में रोहिंग्या समुदाय के लोगों को लोगों को देश के लिए खतरा बताया है। हलफनामें में कहा गया है कि रोहिंग्या देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। बताया गया कि रोहिंग्या के पाक आतंकी संगठनों से संपर्क हैं। कोर्ट को रोहिंग्या के हवाला से भी कनेक्शन बताए गए हैं। गृह की ओर से कहा गया है कि कुछ रोहिंग्या आईएसआईएस से भी जुड़े हैं। कुछ रोहिंग्या मुस्ल्मिों के पास अवैध पहचान पत्र पाए गए हैं।

आईएसआईएस से जुड़े हैं रोहिंग्या मुस्ल्मि
सरकार का दावा है कि कुछ रोहिंग्या आईएसआईएस से भी जुड़े हैं। कुछ रोहिंग्या मुस्ल्मिों के पास अवैध पहचान पत्र पाए गए हैं। केन्द्र ने कहा है कि रोहिंग्या को देश में नहीं रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में दो अक्टूबर को सुनवाई करेगा। भारत रोहिंग्या लोगों को शरण देने के लिए बाध्य नहीं है। इस तरह से भारत में अवैध तरीके से घुसपैठ करने वालों की संख्या 40 हजार तक बताई गई है। केन्द्र ने यह भी कहा कि रोहिंग्या से सांप्रदायिक हिंसा भड़कने का भी खतरा है। कुछ रोहिंग्या देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताए गए हैं। बता दें कि देश के राजस्थान, यूपी, आंध्र प्रदेश व मणिपुर आदि राज्यां में रोहिंग्या अवैध रूप से रह रहे हैं। रोहिंग्या मुस्लिमों के कई आतंकी गुट सक्रिया बताए गए हैं।

बंगाल में मिल सकती है पनाह
सूत्रों के मुताबिक बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रोहिंगिया मुसलमानों को अपने राज्य में शरण देने में रूचि दिखाई है हालाँकि ममता बनर्जी पहले ही म्यामार के शरणार्थीयो को अपने राज्य में शरण की घोषणा कर चुकी है और उन्होंने ऐसा करने के लिए केंद्र सरकार से भी मदद मुहैया करने की अपील की है